हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

आई है दीवाली - महाकवि हरिशंकर 'आदेश'

मौसम है ख़ुशग़वार, सजी रात  है काली।

ख़ुशियाँ बिखेरती हुई आई है दिवाली।।

उतरा है अँधेरे में रौशनी का कारवाँ,

हर ओर हो गई है उजाली ही उजाली।।

छाया है हर तरफ ही आज घोर अँधेरा,

जलते दियों की रौशनी ले आई दिवाली।।

हर ओर खिले रोशनी के बाग़-बग़ीचे,

दुनिया को जगमगाती हुई आई दिवाली।।

हर जाँ सजी हुई हैं क़तारें दियों की यूँ,

लड़ने को आई रोशनी की फौज निराली।।

हर दिल में मोहब्बत के जलाते हुए दिये,

आई है बड़ी शान से इस बार दिवाली।।

दौलत की देवी लक्ष्मी की होती है पूजा,

घर-घर में सजी आज है फिर पूजा की थाली।।

हर दिल से हो नफ़रत का दूर अब तो अँधेरा,

दुनिया में अमन-चैन हो, कहती है दिवाली।।

दामन भरा रहे हमेशा ख़ुशियों से तेरा,

‘आदेश’ मुबारक हो तुम्हें दोस्त! दिवाली।।

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