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‘उत्तरार्द्ध’ का लोकार्पण - संयोजक

मानवीय चेतना की असाध्य विसंगति है जीवन

10-utsava-DSC_0083पूर्वी दिल्ली- प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह ने कहा कि अंग्रेजी कविता ने हमारे देश में अपनी जड़ें जमा ली हैं और हमारी परंपराओं में इसे मान्यता भी मिल चुकी है. केदारनाथ सिंह यहाँ डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, श्रेष्ठ विहार में आयोजित अशोक कुमार महापात्र के अनूदित काव्य-संग्रह ‘उत्तरार्द्ध’ के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे. काव्य-संग्रह को पाठकों को समर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि कवि ने मूलतः अंग्रेजी में कविताएँ लिखी हैं, इनका अनुवाद इतना सशक्त है कि हर कविता अपनी एक अलग छाप छोड़ती है.
‘उत्तरार्द्ध’ के संदर्भ में श्री सिंह ने कहा कि कविताओं में कवि का द्वंद्व दिखाई देता है, तभी वह ह्रदय को स्पर्श करती हैं. महापात्र की कविताओं में भारतीय संस्कृति साफ झलकती है.
सुप्रसिद्ध आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि कविता हर आदमी के जीवन में रची-बसी होती है. हर आदमी हर पल कविता को भोग रहा होता है. और कवि अपनी कविता में जीवन जीने के साथ जीवन दर्शन की तलाश में रहता है.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि ‘उत्तरार्द्ध’ के लेखक ने अपनी कविताओं को जीवन के यथार्थ और दर्शन को बहुत नजदीक से छूने की कोशिश की है और इसमें वे बहुत हद तक कामयाब भी रहे हैं.
उन्होंने कहा कि मानवीय चेतना की असाध्य विसंगति है जीवन. हम जानते हैं कि हम मर रहे हैं, फिर भी अमरता की तलाश में हम भटकते रहते हैं. यह बात कविताओं में बहुत ही सुन्दर ढंग से उकेरी गई है.
सुप्रसिद्ध आलोचक नित्यानन्द तिवारी ने कहा कि कवि की कविताओं में ईश्वर तो है ;मगर धर्म नहीं है, यह लेखक की बहुत बड़ी ख़ासियत है. क्योंकि समाज में धर्म की कोई सृजनात्मक भूमिका नहीं है और आज तो धर्म हिंसक हो गया है. लेखक ने ईश्वर को किसी धर्म से न जोड़कर समाज को एक दिशा दिखाने की कोशिश की है.
अशोक कुमार महापात्र ने कहा कि जब आदमी के जीवन का सूर्यास्त बढ़ता है, तभी जीवन में मादकता भी बढ़ती है. इन्हीं के बीच ‘माई आफ्टरनून पोयम्स’’ जन्म लेती हैं और उनका अनुवाद ‘उत्तरार्द्ध’ के रूप में आज लोगों के सामने है. उन्होंने अपने जीवन में कई कठिन परिस्थियों का जिक्र भी किया और बताया कि किस तरह उन्होंने ख़ुद पर संयम रखकर इनका सामना किया.
अनुवादक डॉ. विनोद कुमार गुप्त तथा शशिकिरण गुप्त ने अनुवाद के दौरान अपने अनुभवों को साँझा किया।
युवा कवयित्री सुधा उपाध्याय एवं कवि महेंद्र प्रजापति ने ‘उत्तरार्द्ध’ की कविताओं का पाठ किया तथा कविताओं की विशेषताओं को लोगों के सामने रखा।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी अकादमी के पूर्व सचिव नानकचंद ने लेखक की पृष्ठभूमि के बारे में बताया कि अपने सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच से ही उन्होंने ‘’माई आफ्टरनून पोयम्स’’ का सृजन किया है। इनका अनुवाद ‘उत्तरार्द्ध’ के रूप में करने वाले डॉ. विनोद कुमार ने और इस किताब का प्रकाशन राधाकृष्ण प्रकाशन ने किया.
राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी ने कार्यक्रम में उपस्थित हुए सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल के निदेशक(उत्तर प्रदेश) डॉ. वीर सिंह, डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, श्रेष्ठ विहार के प्रबंधक एस.के.जैन, उपाध्यक्ष नरेंद्र मुदगिल एवं प्रधानाचार्या प्रेमलता गर्ग समेत साहित्य जगत के कई जाने-पहचाने नाम मौजूद थे.
राम जोशी
राजकमल प्रकाशन समूह