हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

औरत - देवेन्द्रराज सुथार

औरत !

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भट्टीखाने में

धुएँ में

रोटियाँ सेंकती हुई

बच्चों की परवरिश में

गँवा देती है ज़िन्दगी

मर्द की डाँट सहकर

जुल्म बर्दाश्त कर

खामोशी – सी

अख्तियार कर

खड़ी रहती है बुत की भाँति

औरत !

नसीब में

लिखाकर आती है

दर्द का छंद

जिंदगी भर

पड़ोस की सहेलियों के

समक्ष पढ़ती है

दिन में हुई

पल – पल की

हलचल के गीत

औरत !

समर्पण भाव से

मर्यादा के लबादे में

पिता की इज़्ज़त की खातिर

सह लेती है

ससुराल का हर जुल्म

औरत !

पीड़ा का समंदर

साहस का चरम

भावना और ममता का

अथाह प्रवाह

सबको समेटती है

अपने आँचल की छाँव में….

-0-पता :- गांधी चौक ‚ आतमणावास ‚ बागरा ‚ जिला – जालोर ‚ राजस्थान। पिन कोड़ – 343025,devendrasuthar196@gmail.com