हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

कविताएँ - अनुपमा श्रीवास्तव 'अनुश्री'

1- शब्द

शब्द नहीं सिर्फ शब्द
असीमित ऊर्जा का
भंडार है इनमें समाया

शब्द शक्ति से सभी है परिचित
सदियों से बह रहा
यह प्रवाह अपरिमित।

भावाभिव्यक्ति का आधार है
शब्दों का सुंदर संसार
वाणी से निकले वह उद्गार
जो दें ठंडी छांव सी शीतलता।

शब्द धो डालें  हृदय  की व्यग्रता ,

कलुषता और मलिनता
एक बार जो तरकश से निकले
तीर जैसे शब्द तो आते नहीं वापस।

शब्दों का भ्रम-जाल बुनना
निरर्थक बातों को गुनना
झूठ प्रलाप ,व्यर्थ वार्तालाप
यह तो है अपव्यय
यह शब्द शक्ति का क्षय ।

शब्द बने प्रेरणा, अंत:करण की चेतना
जो संकल्प की तरह बहें
जिनकी कश्ती पर सवार होकर
मानव दो जहाँ की बुलंदियाँ छुए ।

शब्द जो अजर-अमर ब्रह्म है
उसका मान रखने में
करना थोड़ा तो श्रम है
एक कुशल  शिल्पी की
तरह शब्दों को गढ़ें
जो पवित्रता, निश्छलता
से आत्मा को छुए ।

-0-

2- नव नभ के पाखी

पाना है नव नभ ,
नया इंसान चाहिए
बेबसी,लाचारी की साँझ  ढले
नूतन विहान चाहिए।

विकास की ऊँची अट्टालिकाएँ
भी हों अगर ग़म नहीं
हृदय को ईंट गारा न  समझे
संवेदनाओं भरा नया जहान चाहिए।

मैं आत्मा किसी बंधन में नहीं
दूर आसमाँ है मेरी परवाज़
अपनी गति से गतिमान
सबसे जुदा  अपना अंदाज़
अंतर्मन में बस यही एहसास चाहिए।

-०-

अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’

जन्म: 28 अगस्त जबलपुर, मध्य प्रदेश

शिक्षा-एम.एससी., एल… एल बी.
साहित्यिक अभिरुचियाँ-कविताएँ, कहानियाँ, आलेख, बाल साहित्य, क्षणिकाएँ
प्रकाशन-अवि, तुम्हारे लिए, बाल काव्य संग्रह प्रकाशित
प्रसारण’-दूरदर्शन, मध्यप्रदेश से’ साहित्य समय, काव्यांजलि, परिवार आदि कार्यक्रमों में काव्य पाठ का प्रसारण एवं संचालन, टॉक शो में भागीदारी।
आकाशवाणी के नारीशक्ति, बालसभा, कोपल कार्यक्रमों में कविताओं, कहानियों, आलेख, बाल रचनाओं का निरन्तर प्रसारण एवं संचालन। E. TV (M.P) ‘-स्क्रिप्ट लेखन एवं कविताओं का प्रसारण
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