हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

कविताएँ - पूनम चन्द्रा ''मनु''

कविताएँ

पूनम चन्द्रा  ‘मनु’ ( कैनेडा)

मनु-FOR HINDI CHETNAजन्म: देहरादून (उत्तरांचल) भारत

शिक्षा: एम. ए. अंग्रेजी साहित्य (गढ़वाल विश्वविद्यालय)

प्रकाशन: जज़्बात (कविता संग्रह) सुलगते लम्हें (उपन्यास) हिन्दी टाइम्स कनाडा समाचार पत्र में धारावाहिक के तौर पर प्रकाशित

सम्मान :हिन्दी राइटर्स गिल्ड स्वयंसेविका 2013

विशेष: हिन्दी राइटर्स गिल्ड (टोरांटो) की सक्रिय सदस्य

व्यवसाय: वेबसाइट डिजाइनिंग,डेवलपमेंट एवं ग्राफ़िक डिजाइनिंग के क्षेत्र में

सम्प्रति: टोरांटो (कनाडा)

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1-पिता

गर्मी की दोपहर में जल कर जो साया दे

वो दरख़्त हो

बच्चो की किताबों में जो अपना बचपन ढूँढे

वो उस्ताद हो तुम

दुनिया से लड़ने कारगों में खून बन कर बहने का 

ज़ज्बा तुम हो

अपने खिलौनों को हर वक़्त तराशने के लिए

हाथों में गीली मिट्टी लिये रहता है 

वो कुम्हार हो तुम

अपने अधूरे खवाबों को पूरा जीने के लिए

ख़ुद की नींद को बाँध कर जो फेंक दे 

वो हौसला तुम हो 

आने वाले कल की नीव रखने वाले

कारिंदे हो तुम 

खुद से भी ज्यादा ऊँचाई से देख पाएँ इस दुनिया को

इसलिए बच्चो को काँधों पर लिये फिरते हो

गर घर जन्नत है

तो उसका आसमाँ तुम हो

पिता हो तुम.

किसी भी खानदान की बुनियाद

सिर्फ तुम हो

सिर्फ तुम

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2-माँ

सोचती हूँ माँ तुझे

किसने बनाया होगा.

किसने तुझे इतना

धैर्य रखना सिखाया होगा

बरसों की तपस्या से

ईश्वर ने कोई मिट्टी पाई होगी

उसी के बनाये साँचे में

तू चुपचाप उतर आई होगी

अपने आधे कर्मों को

कंधों पे तेरे डालकर

पूर्ण रूप दे तुझे वो

एक बार तो मुस्कुराया होगा

कभी सीता कभी मैरी

कभी मरियम है तू

प्रथम शिक्षिका प्रथम प्रेमिका

और प्रथम मित्र है तू

ईश्वर का बोझ उठाए

तू कैसे सुख से जीती है

अपने दुखों को भूल कर

बच्चो के आँसू पीती है

नतमस्तक हूँ मै तेरे चरणों में

कि तू मेरी माता है

किसी जन्म में जो न टूट सके

तेरा मेरा वो नाता है

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3-गिरधर

 साँवरी घटाएँ पहन कर जब भी आते हैं गिरधर

तो ……श्याम बन जाते हैं

बाँसुरी अधरों का स्पर्श पाने को व्याकुल है

वो खुद से ही कहती है –

जाने अब साँवरी घटाओं में क्या ढूँढ रहे हैं

राधिका के आने तक मुझे क्यों नहीं सुन लेते

काफी गीत याद किये है मैंने उनके लिए

एक मै ही हूँ जो सदा साथ रहती हूँ

तब ही कुछ कहती हूँ

जब वो सुनना चाहते हैं ,

पवन तुम ही किंचित बहो ना

तुम्हारे स्पर्श से ही वो मुझे हाथो में ले लेंगे

ये क्या सावरी घटाओं से सूर्य भी दर्शन देने लगे

.वो भी दर्शन के प्यासे हैं

ओह कितना सुन्दर दृश्य है

स्वर्ण जैसी किरणों ने श्याम को छुआ

और देखते ही देखते

श्याम साँवरे

सलोने हो गए.

ये मनमोहक दृश्य सिर्फ मेरे लिए

सिर्फ मेरे लिए !

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