हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

कामयाबी जतन में - रश्मि नायर

आओ चलो हम मनाएँ उसे

वो कल जो रुठा रुठा था हम से

चलो करीब उन्हें जरा बुलाएँ

वो पल जो खिंचे-खिंचे से थे हमसे

एक बार फिर उन्हें सँवारें – सजाएँ

वक्त की चोट से टूट गए जो सपने

इस बात को चलो मान ही जाएँ

सेज फूलों  की है नहीं ज़िन्दगी

कद्र फूलों की कौन करता इस जहाँ में

चुभते काँटे गर न होते माने में

मुश्किल है रुके रहना रुकावटों में

चाह गर है मंजिल की दिल में.

कदमों को चलने से रोक नहीं सकेगी .

कामयाबी उन्हींके कदम चूमे

यकीन करें जो हमेशा जतन में

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रश्मि नायर

प्रेषक : श्रीमती रश्मि नायर,के/ऑफ सुजीत,

1663,उमाभवन ,50 सोयसलेन,के.पी.वल्लन रोड कडवेंथ्रा

एरनाकुलम-682020 केरला (इंडिया)

rashminair0810@gmail.com