हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

किताबें पढ़ती दीमकें-डॉ. ललित सिंह राजपुरोहित - डॉ.ललित सिंह राजपुरोहित

होना तो चाहिए

आइंसटीन से भी तेज

दीमकों का दिमाग

हर रोज चट कर जाती है

पूरी की पूरी किताब

चटकारे लेकर पढती हैं

जमीन के नीचे छुपाई हुई

मस्‍तराम की कहानियों को

तहखानों में संभाल कर रखी हुई

सविता भाभी की रसभरी बातों को

यहॉं-वहाँ बेतरतीब  रखी हुई

कविताओं और हरे-भरे पन्‍नों को

कभी देखा है आपने

तस्‍लीमा या लैने की किताबों का

बॉयकाट करते हुए दीमकों को

अलग-अलग नजरों से देखते हुए

बेस्‍ट सेलर और रद्दी किताब को

दीमकें मन लगाकर पढ़ती हैं

धार्मिक और धर्मविरोधी किताब को

आपसे, मुझसे कहीं आगे हैं दीमकें

वे न केवल पढ़ती हैं

बल्कि अपने भीतर समा लेती हैं

एक दिन में पूरी की पूरी किताब को

 

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डॉ. ललित सिंह राजपुरोहित,

शिक्षा:बीएससी, बीजे एमसी, एलएलबी, पीजीडीएचआरएम, एमए हिंदी, एमफिल, पीएचडी

प्रकाशन :आत्‍माएँ बोल सकती है: कहानी संग्रह,नई कविताएँ: कविता संग्रह.

अधिकारी (राभा) ,मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड,कर्नाटक पोस्‍ट: कुत्‍तेतूर,वाया काटिपल्‍ला-575 030,मंगलूरु कनार्टक

ईमेल-lalit_raj@mrpl. co. in

lalitcallingyou@gmail. com