हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

खामोशी भी एक शब्द है - डॉ.पद्मजा शर्मा

1-खामोशी भी एक शब्द है 

डॉ.पद्मजा शर्मा
डॉ.पद्मजा शर्मा

खामोशी भी एक शब्द है

अगर समझो सुनो उसकी गूँज तो

बहुत कुछ कहती

पीड़ा दर्द आक्रोश विवशता और घुटन

सबको सहती

चुप रहती

खामोशी भी एक शब्द है

अगर समझो सुनो उसकी गूँज तो

आँधियों सी चलती

आग सी जलती कभी नहीं बुझती

धूप में नंगे पाँव मचलती

लू के थपेड़े सहती

फिर भी किसी से कुछ नहीं कहती

खामोशी भी एक शब्द है

अगर समझो सुनो उसकी गूँज तो

लहरों सी किनारों से टकराती

जाने कैसे कैसे नाच नचाती

एकांत पाते ही बहुत शोर मचाती

अंधेरों में तो बस आग सी लपलपाती

जो आया राह में उसको लील जाती

खामोशी भी एक शब्द है

अगर समझो सुनो उसकी गूँज तो

दर पे आई खुशियों को झिड़कती

मुस्कराहट से दूर छिटकती

छाया सी सिमटती

घावों पर नमक सा छिड़कती

यह अजगर सी लिपटती

खामोशी भी एक शब्द है

अगर समझो सुनो उसकी गूँज तो

यह घावों को कुरेदती

शांत पानी में कंकड़ फेंकती

जार जार रुलाती

खामोशी सन्नाटों को बुलाती तब

जब वे रात के अंतिम पहर में सोने वाले होते

इस तरह यह सन्नाटों को सतत जगाती

खामोशी भी एक शब्द है

अगर समझो सुनो उसकी गूँज तो

खामोशी के नंगे तार जब छूते

झुलसा देते तन मन को इस कदर

कि फिर बोलने को कुछ रह नहीं जाता शेष

चीख मारती चुप्पी खो जाती भीतर

अभी अभी मरे बच्चे की माँ -सी गिड़गिड़ाती

खामोशी भी एक शब्द है

अगर समझो सुनो उसकी गूँज तो

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2-लिखता है 

जब कोई प्यासा पानी पर अमिट प्यास लिखता है

कोई परिंदा आसमान पर जुनूनी उड़ान लिखता है

काल के गाल पर कोई बच्चा प्यारी सी मुस्कान लिखता है

तब मुझे तुम्हारी याद आती है

कोई रोती आँखों पे दुनिया के दर्द तमाम लिखता है

कोई धोखा खाने के बाद भी अटूट विश्वास लिखता है

कोई टूटा हुआ दिल बार बार जब अरमान लिखता है

तब मुझे तुम्हारी याद आती है

हर शब्द जब कोई अर्थवान् लिखता है

कोई अपनी ही जिंदगी को छील छील के वीरान लिखता है

दुनिया को जंगल और जंगल को बियाबान लिखता है

तब मुझे तुम्हारी याद आती है

नफरत घृणा वैर  हत्या के ख़ौफ़नाक इस समय में

जब कोई सिरफिरा

मिट्टी पर सिर्फ प्यार और ईमान लिखता है

तब मुझे तुम्हारी याद आती है

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