हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

चुप - जनमेजा सिंह जोहल

भाषान्तर

नमेजा सिंह जौहल एक अनूठा कलाकार है।आपने पंजाबी सभ्यता को दर्शाती फोटोग्राफ़ी की और देश विदेश में अनेक प्रदर्शनियों में भाग लिया। कोई ऐसी पत्रिका नहीं होगी जिसने जौहल के काम को अपने मुख्य पन्ने पर न प्रकाशित किया हो। आपने भारत की मुख्य पत्रिकाओं के लिए लिखा और फ़ोटोग्राफ़ भेजे। आपने फ़ोटोग्राफ़ी के माध्यम से खुद को लोगों में प्रस्तुत किया। देश -विदेश की यात्रा की और 4 पुस्तकें बच्चों के लिए, 3 कविता की पुस्तकें, एक किताब फ़ोटोग्राफ़ी पर प्रकाशित की है। आप पंजाबी हाइकु में भी दिलचस्पी रखते हैं। 

डॉ हरदीप सन्धु(अनुवाद; डॉ हरदीप सन्धु)

जब कभी

कोई अपना

इस संसार से

चला जाता है

तो मैं

किसी न किसी

वृक्ष के

गले लगकर रो लेता हूँ

अपने गम की

बात करता हूँ

वृक्ष

चुपचाप सुनता है

औेर अपनी चुप

मेरे भीतर भर देता है

मैं शांत हो कर

जीवन के

आगामी सफ़र पर

चल पड़ता हूँ।

 

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