हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

डर - ऋतु कौशिक

आज प्रिया को अपनी सहेली के घर से लौटते हुए शाम हो गई थी। प्रिया घबराहट के मारे जल्दी- जल्दी घर जा रही थी,उसे डर था माँ की डाँट का। घर पहुँचकर धीरे से दरवाज़ा खोला ,तो सामने माँ 001-ॠतु कौशिकका तमतमाया चेहरा देखकर सहम गई।
प्रिया कुछ कहती इससे पहले माँ फट पड़ी,”कहाँ थी इतनी देर ,तुझे कितनी बार कहा है क़ि वक़्त से घर आ जाया कर,पता है न कैसा माहौल है,पर तू है कि समझती ही नहीं।”

सहमी हुई  प्रिया चुपचाप अपने कमरे में चली गई।
रात के बारह बज रहे थे, पर उसके भैया घर नहीं आए थे। पिता के चिंता जताने पर माँ बोली आ जाएगा,लड़का है,उसका क्या है,होगा अपने दोस्तों के साथ।

“दोस्तों के साथ तो होगा; लेकिन कहाँ होगा? किसी मन्दिर में तो नहीं होगा इस वक़्त!”

“आप डाँट -फटकार करेंगे , तो बड़े बेटे की तरह यह भी हाथ से निकल जाएगा।कुछ कर बैठा तो?”

पिता भुनभुनाते हुए अपने कमरे में चले गए-“करो , जिसको जो करना हो!”

प्रिया पिता की इस मज़बूरी पर अवाक् रह गई!

-0-

ऋतु कौशिक

शिक्षा: एम.एस.सी.( एनवॉयर्नमेंटल साइंस)

सम्पर्क-हाउस नंबर 43सी,प्रोफेसर कॉलोनी,गंगवा रोड,हिसार-125001

सम्प्रति-आकाशवाणी हिसार में आकस्मिक उद्घोषिकाऔर दूरदर्शन में आ0 समाचार  वाचिका।

ritukaushiktanu@gmail.com