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डलहौजी में तीन दिवसीय ‘राम सरूप अणखी कहानी गोष्ठी’ संपन्न - सम्पादक

गत 27-28 अगस्त 2016 को डलहौज़ी में पंजाबी के प्रख्यात लेखक राम सरूप अणखी की स्मृति 0में तीन दिवसीय कहानी गोष्ठी सम्पन्न हुई। ‘कहाणी पंजाब’ द्वारा हर वर्ष आयोजित होने वाली यह 21वीं गोष्ठी थी। अणखी जी के निधन के बाद उनके सुपुत्र क्रांतिपाल जी इसे सक्रिय रखे हुए हैं।

तीन सत्रों में चली इस कथा गोष्ठी में पंजाबी, हिंदी और राजस्थानी कहानीकारों की 13 कहानियों का पाठ हुआ और उन पर खुलकर चर्चा हुई। राम सरूप अणखी, केसरा राम, इंद्रजीत शाही, गोवर्धन गब्बी, मनमोहन बावा, गुल चौहान की पंजाबी कहानियों तथा भरत ओला, मदन गोपाल लढ़ा की राजस्थानी कहानियों का हिंदी में किया गया अनुवाद पढ़ा गया। धनञ्जय सिंह, सुभाष 2नीरव, अमरीक सिंह दीप, महेश दर्पण और डॉ. अब्दुल बिस्मिल्लाह ने अपनी कहानियों का पाठ किया। पढ़ी गई कहानियों पर डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. नीरज, डॉ. अजय बिसारिया, महेश दर्पण, सुभाष नीरव, केसरा राम, भरत ओला, गोवर्धन गब्बी, गुल चौहान, गुरमेज गुराया और अब्दुल बिस्मिल्लाह ने चर्चा की। खास बात यह रही कि तीन भाषाओं की पढ़ी गई कहानियों के बहाने समकालीन भारतीय कहानी की नब्ज़ को टटोलने का प्रयास करते हुए बदलते समय में कहानी के बदलते स्वरूप को रेखांकित करने का प्रयास किया गया।

3डॉ. अब्दुल बिस्मिल्लाह का कहना था कि विश्लेषण तो खराब कहानी का होता है। अच्छी कहानी का विश्लेषण नहीं किया जाना चाहिए। अच्छी कहानी का विश्लेषण करना ऐसा ही है, जैसे खुशबू की खोज में फूल की पंखुड़ियों को तहस-नहस करना। इस कथा गोष्ठी में पंजाबी अकादमी, दिल्ली के सचिव गुरमेज गुराया भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मनमोहन बावा की चुनिंदा कहानियों की किताब का विमोचन भी हुआ जिसका हिंदी अनुवाद अमरीक सिंह दीप ने किया है।

प्रस्तुति- सुभाष नीरव,31 अगस्त 2016