हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

दिल के रिश्ते, हिन्दी में जिए - भावना सक्सैना

bhawna-saksena थपकी से सोती थी जब मैं

हिन्दी  में सुनती थी लोरी

बाहों के पलने में भी तो

बाँधी हिन्दी  ने ही डोरी।

 

साँसें माँ की, और गीत भी

हिन्दी  में ही महसूस किए

दिल के सारे ही रिश्ते भी

हिन्दी  में मैंने सदा जिए।

 पाठ पढ़ा जब भी अंग्रेजी

हिन्दी  ने ही विश्वास दिया

बनी स्नेह- पूरित आलम्ब

सब मित्रों का उपहार दिया।।

 जब मौन भी बाँचा क ख ग ने

भावों ने भी मृदु तान भरी

तरल प्रेम उतरा नैनों  में ।

हिन्दी  में जब मुस्कान भरी ।

 हिन्दी  मन ही मन रही सिखाती

अंग्रेजी  थी जब जब बोली

पग पग पर साथ निभाया है

सदा रही मेरी हमजोली

 हिन्दी  लेकर परदेस

दुनिया में सम्मान दिलाया

मेरी रगरग में भरी स्फूर्ति

हिन्दी  में खुद को है पाया।

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