हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

दोहे- - रोचिका शर्मा (खांडल)

1

रोचिका शर्मानशा बुरा है मानिए, छोड़ दीजिए आज

मान और सम्मान फिर,देगा खूब समाज

2

दारू में डूबे हुए,तड़पें सारे लोग

इसको  पीने के लिए, छोड़ें  छप्पन भोग

3

बोतल पर है क्यूँ लगी, घर की खुशियाँ दाव

खाने को रोटी नहीं , पूछें दारू- भाव

4

नाश नशे की लत करे, घर में हो तकरार

नारी निश दिन सह रही, पौरुष अत्याचार

5

युवा देश के यूँ कहें,है ये फैशन आज

गलियों में गांजा बिके, पुस्तक पड़ी दराज

6

धूम्रपान घातक बड़ा, मगर पिएँ सिगरेट

सड़े एक दिन फेफड़ा, लगे नाम संग लेट

7

डूब नशे में जाइए, हर दुःख जाता भूल

बड़ी भूल हैं कर रहे, इज्जत मिलती धूल

8

होश हुए हैं  गुम कहीं, बोतल चढ़ी दिमाग

नारी की इज्ज़त उड़ी, और पुरुष की पाग

9

गृह सज्जा फैशन नई, शो केस बने बार

मात-पिता फोटो हटी, बोतल से शृंगार

-0-

शिक्षा: एलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग (कोटा),DNIIT software programming(मुंबई) अनुभव : टेलिमॅटिक्स इंडस्ट्री में इंजिनियर के पद पर कार्यरत रही |

सम्प्रति  : डाइरेक्टर  सुपर गॅन ट्रेडर अकॅडमी प्राइवेट लिमिटेड

ई-मेल- sgtarochika@gmail.com