हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

कविताएँ - डॉ∙अनन्त कुमार

1-ईश्वर आपका भला करे

किसी स्टेशन पर

किसी ने कहा
ईश्वर के नाम पर कुछ दे दे
ईश्वर आपका भला करेगा
मैं सोचता रहा
ईश्वर इसका भला क्यों नहीं करता
फिर
किसी ने कहा
ईश्वर अपरम्पार है
उसकी महिमा अपरम्पार है
यह मेरी अज्ञानता थी
जो ईश्वर की सत्ता को
ललकार रहा था
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2-साम्प्रदायिकता

हम साम्प्रदायिक होते नहीं
बनाए जाते हैं

कभी धर्म के नाम पर
तो कभी मजहब, अस्मिता
और अस्तित्व के नाम पर

वे कहते हैं
साम्प्रदायिक होना जरूरी है
धर्म की रक्षा के लिए
मजहब, अस्मिता
अस्तित्व की रक्षा के लिए

वे कहते हैं
दूसरे धर्मों को मिटा कर ही
अपने धर्म की रक्षा कर पाएँगे
दूसरो की अस्मिता और अस्तित्व मिटा कर ही
अपनी अस्मिता और अस्तित्व बचा सकेंगे

वो कहते हैं
हमारा साम्प्रदायिक होना ही हमारे धर्म
मजहब या अस्तित्व को बचाएगा

भयभीत हूँ
खुद से डरने लगा हूँ
ये भय हमारे साम्प्रप्रदायिक होने का है
क्या कल मैं भी साम्प्रदायिक हो जाऊँगा ?

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डॉ∙अनन्त कुमार