हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

पुस्तक परिचय - डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा

1-मन के मनके (काव्यसंग्रह ) : डॉ. सुधा गुप्ता  पृष्ठ-138,मूल्य-260 रुपये,प्रथम  1-मनके मनकेसंस्करण-2016

यह काव्य-संग्रह सिद्ध कवयित्री डॉ. सुधा गुप्ता जी के मन के ऐसे मनकों का संग्रह है, जिनकी क्षण भर की कौंध से मन प्रकाश से नहा जाए, रस से सराबोर हो , नाच उठे । समर्पण से एक ही कामना तक 187 क्षणिकाओं में एक भी ऐसी नहीं कि जिसे पढ़कर मन निःशब्द न हो जाए । आह ! और वाह !  की परिधि से परे अव्यक्त आनन्द की स्रोतस्विनी क्षणिकाएँ साहित्य -जगत् की अमूल्य निधि हैं । नन्ही कली हो या वसंत के प्रेम-पत्र, कैक्टस पुत्री , रात माँ ,मासूम दिल, हमजोली , मृगजल , सूरज का गुस्सा , गल्प कोरी गल्प ,एक-एक मनका बोलता है मन की बात । उनके शब्द निरे शब्द नहीं  ,स्वयं  आत्मा का नाद हैं , सहृदय पाठकों के हृदय से सहज योग में समर्थ भी । पुस्तक कवयित्री के कोमल भावों का सरस उदघाटन है ।

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2-मन पंछीसा (हाइकुसंग्रह :सुदर्शन रत्नाकर,पृष्ठ :98, मूल्य :200 रुपये ,प्रथम संस्करण 2-Man Pnchi Sa-2016 

मन पंछी-सा हाइकु संग्रह कवयित्री का दूसरा हाइकु संग्रह है ,जिसके आठ खण्डों में आबद्ध कलेवर में उनके 580 हाइकु संगृहीत हैं । 5-7-5 वर्णों के लघु कलेवर हाइकु में प्रकृति के इतने सुन्दर , मोहक दृश्य साकार किए कि क्या कहा जाए । फूल, तितली, चिड़िया , भोर , सूरज , कलियाँ कहाँ तक गिनाऊँ ,प्रकृति इस तरह पुस्तक में उतर आई कि दृष्टि मुग्ध हो, मन मुस्कुरा  उठे । तो दूसरी ओर प्रकृति से इतर अपने आस-पास का परिवेश , सामाजिक विसंगतियां भी कलम का विषय बन अद्भुत भावधारा प्रवाहित करने में समर्थ हैं । पर्यावरण के प्रति चिन्ता है तो विकास की अंधी दौड़ का भयावह परिणाम भी है । संवेदनहीन समाज के निर्दय चेहरे को दर्पण दिखाती कवयित्री खुद ही दिलासा भी देती दिखाई पड़ती हैं । निःसंदेह  नन्हा पंछी धरा से अम्बर तक देखे – भोगे सत्यों को स्वर देता हुआ अपनी उड़ान के विस्तार को प्रकट करने में समर्थ हुआ है ।

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3-परिंदे कब लौटे (चोकासंग्रह)  : डॉ. भावना कुँअर ;पृष्ठ-90 , मूल्य – 180 रुपये,प्रथम 3---Parinde Kab Lauteसंस्करण-2016

‘तारों की चूनर’ , ‘धूप के खरगोश’ (दोनों हाइकु-संग्रह), ‘जाग उठी चुभन’(सेदोका –संग्रह) की सुघड़ रचनाकार डॉ. भावना कुँअर का चोका –संग्रह ‘परिंदे कब लौटे’ अपनी रुचिर-भाव-पूर्ण प्रस्तुति है । प्रवासी मन की अपनी मिट्टी के प्रति तड़प ,नारी मन की छटपटाहट के साथ–साथ प्रकृति , प्रेम में  छल-छद्म , विरह और मिलन के ख़ूबसूरत बिम्ब लिए भावना जी की 36 चोका कविताएँ बेहद प्रभावित करती  हैं । जहाँ नन्ही परी के आगमन पर उनका काव्य-संसार झूम उठता है…तो वहीं उदास मन को प्रकृति कितने जतन से मुदित करने का असफल प्रयास करती है –‘दुखी सलवटें’ इसका बहुत ख़ूबसूरत उदाहरण है । ‘याद-परिंदे’ , ख़्वाबों में ‘मेरी अम्मा का गाँव’ , वहशी दरिंदों का शिकार बनी मासूम परी की ‘दर्द भरी कहानी’ पुस्तक की ऎसी भाव प्रवण चोका रचनाएँ हैं जो मन में गहरे उतर जाती हैं । ‘बिछोह-घड़ी’ विदा होती बिटिया के मन का छलक उठना है तो ‘माँ का दुःख’ उपेक्षित माँ के दर्द की अव्यक्त व्यथा कथा है ।रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव से उपजे अवसाद और प्रेम की भूलभुलैया में भटकन से उपजी थकन का समाधान जानती हैं कवयित्री ।‘लॉरीकीट जोड़ा’ और ‘नन्हा टाइलर’ कविताएँ कवयित्री के प्राणिमात्र के प्रति प्रेम से परिपूर्ण अति संवेदनशील मन का सुन्दर दर्पण हैं ।

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4-मैं घर लौटा (काव्यसंग्रह) :रामेश्वर काम्बोज हिमांशु,पृष्ठ-186 ,मूल्य:360 रुपये,प्रथम  4-Main Ghar Lauta (2)संस्करण-2015

””””””””””””””””मैं घर लौटा”””””””””””””””” काव्य संग्रह विविध विधाओं के निष्णात रचनाकार रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी के अनुभूत सत्यों का जीवंत दस्तावेज है । 1993 में प्रकाशित ””””””””””””””””अँजुरी भर असीस”””””””””””””””” काव्य संग्रह के 22 वर्ष उपरान्त कवि के संवेदनशील मन की मधुर-तिक्त  अनुभूतियाँ धीरे-धीरे आकार लेती  रहीं और पुस्तक के रूप में आपके सम्मुख हैं  । जीवन-पथ के पथिक ने नगर-नगर, डगर-डगर जो देखा, जो भोगा वही अपनी कविताओं में गाया है ।  विविध अनुभूतियों, सामाजिक परिवेश और प्रकृति को शब्दों में जीवंत किया है । रिश्तों की कटुता है तो मिठास भी है , समाज की विसंगतियों पर आक्रोश है तो तप कर कुंदन बनने का सन्देश भी है । निराशा से आशा तक का सफर तय करते कवि का स्व से साक्षात्कार ही उनका घर लौटना है ,जो अपने साथ-साथ अपने पाठकों को भी इस आनन्द की अनुभूति कराने की सामर्थ्य रखता है ।

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प्रकाशकअयन प्रकाशन , 1/20,महरौली, नई दिल्ली-110030

सम्पर्क सूत्रडॉ ज्योत्स्ना शर्मा,टॉवर एच–604, प्रमुख हिल्स, छरवडा रोड, वापी ,जिला वलसाड(गुजरात) –396191