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फरीदाबाद में ‘सृजन गंगा’ की लहरें प्रवाहित - सम्पादक

फरीदाबाद. 24 दिसंबर 2017 को हरियाणा साहित्य अकादमी के तत्त्वावधान में डी.ए.वी सेंटेनरी कॉलेज के प्रांगण में सुदर्शन रत्नाकर की अध़्यक्षता व डॉ़ सतीश आहूजा और डॉ़ बलदेव वंशी जी के विशिष्ट आतिथ्य में सृजन गंगा शृंखला के अन्तर्गत एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका, कुशल संयोजन व मंच संचालन श्रीमती भावना सक्सैना ने किया। संयोजक ने बताया कि अकादमी की इस शृंखला का उद्देश्य न सिर्फ ऐसे रचनाकारों को मंच प्रदान करना है ,जो इसके हकदार हैं ;अपितु नए व प्रतिष्ठित रचनाकारों को जोड़ना भी है। अकादमी निदेशक डॉ. कुमुद बंसल के स्वयं कार्यक्रम में उपस्थित न होते हुए भी सभी अतिथि भावनात्मक तौर पर उनकी सौम्य स्निग्ध गरिमामयी उपस्थिति का अहसास करते रहे। गोष्ठी में उपस्थित  जिले के कलमवीरों ने अपनी इन्द्रधनुषी प्रस्तुति से लगभग तीन घंटे तक समाँ बाँधे रखा। गौरतलब है कि जिला फरीदाबाद में बहुत से वरिष्ठ साहित्यकार मौजूद हैं और उनमें से कईं साहित्यकार जैसे प्रदीप गर्ग व राघवेन्द्र सैनी इस कार्यक्रम में सिर्फ अपनी उपस्थिति से प्रेरणा व प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और डॉ. दुर्गा सिन्हा उदार द्वारा सरस्वती वंदना के सस्वर पाठ से हुआ। अकादमी की परंपरा के अनुसार मुख्य अतिथियों का स्वागत श्रीफल से किया गया। नवोदित कवि शिवम राणा के काव्यपाठ से प्रवाहित सृजन -गंगा की लहरों में जहाँ कमल कपूर ने नारी को सृष्टि का आधार बताया, तो आश्मा कौल ने बेटियों के कोमल अहसासों को रेखांकित किया। सुषमा गुप्ता ने विचारहीन भीड़ पर करारा व्यंग्य किया। एन.एल गोंसाईं जी ने अपनी कविता ‘आज फिर व्याकुल है भारत भारती में देश की वर्तमान स्थिति का मार्मिक चित्रण किया ,तो वरिष्ठ गीतकार विजय मेहरोत्रा ने शहीदों की चिट्ठी जयचंदों के नाम के सस्वर पाठ से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रकाश लखानी ने आज़ादी के लिए मर-मिटे सेनानियों को याद किया और नीलम दुग्गल ने सीमा पर बसे तंबुओं के शहर और मौत के तांडव का चित्रण करते हुए कामना की कि ऐसे शहर बसाने की नौबत ही न आए।

हरेराम नेमा समीप के दोहों में बेटी की करुण पुकार थी – माँ मुझसे मत छीन तू जीने का अधिकार। डॉ. वेद व्यथित ने मुस्कानों का महत्व आँका और अंजु दुआ जैमिनी ने साँसों के सफर का। अजय अज्ञात ने दरख्तों के कटने पर चिंता व्यक्त की और ज्योति संग ने गज़ल सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गोष्ठी में डी.ए.वी कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष शुभदर्शन तनेजा के साथ साथ बालमोहन पांडेय, अरुणा कालिया, नीलम दुग्गल, इंदु गुप्ता, अनिल बेताब, सुरेखा जैन, दुर्गा सिन्हा, राजकरणी अरोड़ा, सुनीता पाहूजा ने भी प्रभावशाली रचनाओं का पाठ किया।

विशेष अतिथि डॉ. बलदेव वंशी ने कविता पर अपने विचारों के साथ अपनी रचना अकेले फूल के पास जाया करो का पाठ किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. सतीश आहूजा के सहृदय उद्बोधन और श्रीमती सुदर्शन रत्नाकर के अध्यक्षीय संबोधन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

-0- प्रस्तुति-भावना सक्सैना [ हिन्दी  चेतना-प्रतिनिधि -भारत]