हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

静夜思 –मध्य रात्रि में घर की याद - ली पाय

भाषान्तर(चीनी से अनुवाद)

  काव्यानुवाद ,वं अर्थ और परिचय – डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर ’   एवं  विवेक मणि त्रिपाठी

 

मूल कविता  –

 前 明月光,疑 是 地 上 霜

举头 望१०  明月११ ,低头१२  思१३  故乡१४

अर्थ – आधी रात का समय है. सर्वत्र शरद की दूधिया चाँदनी फैली हुई हैं,इस सुहानी रात में कवि अपने घर से बहुत दूर निर्जन प्रदेश में स्वजनों की स्मृति में खोया हुआ चन्द्रमा को निहारता हैं और फिर सिर निचा करके अपनों की सुधियों में खो जाता हैं .

काव्यानुवाद –

मध्य रात्रि की नीरवता में

खिड़की से भीतर

अन्यमनस्क-सा

झाँकता हुआ

उन्मन-उन्मन

एकाकी चाँद

मध्य रात्रि की नीरवता में 

बो रहा है शांति के बिंदु बीज

नम है धरा की कोख

उदास पौधों ,लता द्रुम की

पत्ती-पत्ती से झर रही है

जमी हुई अनंत शीत उदासी

मेरी ही तरह

बहुत दूर आ गया है

यह चाँद भी अपने घर से ।

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静夜思:चिंग ईए  त्स  – मध्य रात्रि का अकेलापन,

静- चिंग  – शांत, 夜 – ईए –  रात्रि, 思 – त्स – याद करना,

. 床 – छुआंग – बिस्तर 2.前 – छिएन – के सामने 3 .明月光 – मिंग यूए कुआंग – चांदनी रात 4. 疑 – ई  – प्रतीत होना 5 . 是 – श  – हैं

地  – ती  – भूमि 7 . 上  -शांग –  पर 8 . 霜 – शुआंग – बर्फ   9 . 举头 – च्वी थौउ – सिर उठा कर देखना 10 . 望 – वांग  – के तरफ 11 . 明月 – मिंग युए  – चंद्रमा 12 . 低头 – ती थौउ – सिर झुका कर  देखना13 . 思 – तस – याद करना 14 . 故乡 –  कु शिआंग  -मातृभूमि

ली पाय (08-02-701 –  06-12-762)

ली पाय चीन के इतिहास में स्वर्ण युग के नाम से प्रसिद्ध  थांग वंश के शासन काल के  महान कवि हैं, इन्हे यंहा कवियों में सिरमौर  माना जाता है ,इनके साहित्य की गुणवत्ता के कारण इन्हें  “अमर कवि ” की उपाधि से चीनी जनसमाज द्वारा विभूषित किया गया . इनका जन्म वर्तमान किग्रिस्तान में हुआ था, पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है .ये प्राचीन चीनी साहित्य के रोमांटिक कविता के जनक कहे जाते है.ईनकी कविता रोमांटिसिज्म ,सुरुचिपूर्ण कल्पनाशीलता ,नवीनता के लिए विख्यात हैं .प्रकृति के सुमनोहर चित्र को अपने कविता में सजीवतापूर्वक उतारकर चीनी कविता को नई ऊँचाई पर पहुँचाया !

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डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर ’  ;वर्तमान में चीन के कुआन्ग्तोंग वैदेशिक अध्ययन विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर । काव्य और गद्य की विविध विधाओं में 20 से अधिक कृतियाँ प्रकाशित ।2845009097@qq.com

विवेक मणि त्रिपाठी : वर्तमान में चीन के कुआन्ग्तोंग वैदेशिक अध्ययन विश्वविद्यालय में हिंदी के सहायक प्रोफेसर । गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, गांधीनगर एवं मगध विश्वविद्यालय ,बोधगया में चीनी भाषा एवं साहित्य के अध्यापन का दीर्घानुभव।

2294414833@qq.com, +86-13076748062

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