हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

ममता का एहसास - सिम्मी भाटिया

सिम्मी भाटिया
सिम्मी भाटिया

दिन भर काम कर के घर लौटी तो देखा अम्मा भाभी के पैर दबा रही है।यह सब देखकर गुस्सा तो बहुत आया पर मुख मौन ही रहा। टिफिन रख फ्रेश होने के लिए जाने लगी तो अम्मा बोली –“बिटिया,रसोई में दूध रखा है चाय बनाकर पी लो और हां थोड़ा दूध बचा भी लेना ।अभी बहू उठेगी तो उसको चाय बना दूँगी”अम्मा की बात सुनते मेरा पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया गुस्से में उठकर मैं दूसरे कमरे  चली गई और बिस्तर पर ओंधे मुह  लेट गई और सोचने लगी क्या  यह वही अम्मा है? जब मैं स्कूल से आती थी तब अम्मा  अपने हाथ से गरम-गरम खाना मुझे खिलाया करती थी और स्कूल की ,सखी सहेलियों की बातें मजे लेकर सुनती थी पर अब अम्मा को मेरी जरा भी फिक्र नहीं सोचते-सोचते मेरी आँख लग गई  । तभी अम्मा की आवाज सुनाई पड़ी- ”बिटिया चाय नहीं बनाई क्या? बना लेती खुद भी पीले और भाभी को भी पिला दे। जा ”

“नहीं मुझे नहीं पीनी चाय -वाय”

जाओ तुम उसकी ही तिमारदारी करो मैं ,तो तुम्हारी कुछ नहीं लगती।

”अरे बिटिया तू तो मेरी रानी बेटी है, वह भी तो मेरी ही बेटी है’’

सुबह से ना कुछ खाया है ,ना पिया बस बदन तप रहा है

“हा तो जाओ न, बदन भी दबा दो”

“देख बिटिया उसके दुख सुख में हमारा ही तो फर्ज है उसकी देखभाल करना

“पर अम्मा” तुम उसकी बहू थोड़े न हो, वह  तुम्हारी बहू है।

“बिटिया ये किसने कह दिया की केवल बहुओं की ही सारी जिम्मेदारी है ।और उससे क्या फर्क पडता है,  बस इतना ही तो फर्क है कि मैंने उसे जन्म नहीं दिया ; वह भी तो हमारे लिए एक पैर पर खड़ी रहती है अपने परिवार को छोड़ कर आई है तेरी बहन है

“तो दवा खाकर सो जाती । पैर दबाने की क्या जरूरत थी।”

“अरे मैंने उसको बोला कि डॉक्टर को दिखा ले पर बोली- “माँजी जीजी आ जाए तब चली जाऊँगी।आप कहां ले जाओगी और जीजी की भी तबीयत तो ठीक नहीं रहती< इसी बहाने वह भी डॉक्टर को दिखा लेगी।

“जा जा बिटिया अब तू हाथ मुँह धो ले।”

रसोई में बर्तनों की आवाज आने लगी और मैं अतीत में खो गई ।जब मुझे बुखार होता तो अम्मा पूरी रात मेरे पास बैठी रहती सिर दबाती पैर दबाती और मेरे ठीक होने की प्रार्थना करती रहती ।

ठीक ही तो कहा अम्मा ने भाभी भी तो उन्हीं की बेटी है तो उनका ख्याल वो नही तो कौन रखेगा।

मेरे सम्मुख अब बोलने को कुछ न था शायद इसीलिए मेरे मुख से निकला-“भाभी अब कैसी हो। चाय पी लो फिर चलती हूँ।”

“जीजी पहले आप चाय पी लो ।ऑफिस से आने के बाद आपने भी तो नही पी।”

और अब मैं भाभी  के प्यार के सामने खुद को बौना पाने लगी।

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