हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

मैं बुद्ध होना चाहती हूँ - सत्या शर्मा 'कीर्ति'

पाती हूँ अकसर
लेते है बुद्ध जन्म
सत्या शर्मामेरे भी अंदर
और फिर उठते हैं कई सवाल
मन की कंदराओं में

जानना चाहती हूँ
सत्य , अहिंसा , शील , ज्ञान की
असीमित सी बातें
जन्म- मृत्यु के रहस्यों की
ज्ञानमयी बातें…

जरा – मरण के चक्र से परे की
अनगिनत रहस्मयी बातें
बचपन ,यौवन , बुढ़ापे के
चक्र को समझना चाहती हूँ

मैं बुद्ध नहीं हूँ
पर बुद्ध होना चाहती हूँ

पर ज्ञानेन्द्रियों , कर्मेन्द्रियों के
पकड़ से छूटता मेरा मन
मोह – माया की जंजीरे

तोड़ नहीं पाता
और अकसर बुद्ध को सुला
सांसारिक सुख की मृगतृष्णा में
‘ स्व’ की पहचान ढूँढने लग जाती हूँ

पर पुनः किसी रात की नीरवता में
जाग जाते हैं फिर नन्हे बुद्ध
करते हैं सवाल
जीवन के सत्य और माया से
जुड़े अनेक प्रश्न….

तब जागती है अंतश्चेतना
और तब मोक्ष द्वार पर खड़े हो
भिक्षा पात्र में ‘ स्व’ को पाना
चाहती हूँ

मैं बुद्ध नहीं हूँ
पर बुद्ध होना चाहती हूँ ..
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10 मई, 2017