हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

रामायण में चरित्र- चित्रण :राष्ट्रीय परिसंवाद - संयोजक

डॉ कविता भट्ट का स्वागत करते हुए प्रो•सुनीता बेन ठक्कर
डॉ कविता भट्ट का स्वागत करते हुए प्रो•सुनीता बेन ठक्कर

गुजरात साहित्य अकादमी एवं डीसा कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स, डीसा, बनासकांठा, गुजरात के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘रामायण में चरित्र चित्रण’विषय पर डीसा कालेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स में राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन दिनांक 29-02-2016 को संस्कृत विभाग के उपक्रम में किया गया।  परिसंवाद में रामायण के विभिन्न चरित्रों से आदर्श तथा व्यवहार सम्बन्धी शिक्षा ग्रहण करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में रामायण कालीन चरित्रों के अध्ययन की भूमिका को प्रस्तुत किया गया; कार्यक्रम का प्रारम्भ कालेज के ट्रस्टी श्री पराग भाई पटेल तथा मुख्य अतिथि सेठ श्री एल एच माली तथा श्री चन्द्र कान्त पडियार,आदर्श हाईस्कूल, मालगढ़ के कर कमलो द्वारा उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ, तत्पश्चात् कालेज की प्राचार्य प्रो वंदना बेन सिसोदिया ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया, नियामक श्री छगन भाई पटेल ने कालेज का परिचय आदि प्रस्तुत किया कार्यक्रम के संयोजक व संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ भानु भाई पटेल ने समस्त अतिथियों के परिचय के साथ ही परिसंवाद की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला

                    उद्घाटन सत्र के विशिष्ट सारस्वत व्याख्याताओ में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ राजेंद्र जी रामायण में चरित्र चित्रणनानावटी,पूर्व नियामक प्राच्य विद्या मंदिर, महाराणा सय्याजी राव विश्वविद्यालय; बड़ोदरा, गुजरात; डॉ कविता भट्ट, दर्शनशास्त्र विभाग, हे न ब गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड; राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मणी  भाई प्रजापति, पूर्व नियामक द्वारिका कालेज; डॉ. हेमराज भाई पटेल, पूर्व प्रधानाचार्य कांकरेज कालेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स थे. इन सभी सारस्वत व्याख्याताओं ने  रामायण को सभ्यता एवं संस्कृति का आधार स्तम्भ बताया. मानवता के मूल्यों को प्रतिष्ठापित करने हेतु इस पर पुन पुन परिचर्चा, चिंतन एवं मंथन की आवश्यकता पर बल दिया। सभी वक्ताओं ने अपनी ओजस्वी शैली में भारतवर्ष की गौरवमयी परम्परा में रामायण के महत्त्व को स्पष्ट किया। वक्ताओं ने मन की रामायण के नैतिक आदर्शो को अपनाकर भारत वर्ष पुन विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित होगा और वर्तमान परिस्थितियों में इन आदर्शो को अपनाना आवश्यक है। परिसंवाद का रामायण सत्र श्री छगन भाई पटेल एवं कॉलेज की प्राचार्या की उपस्थिति में संपन्न हुआ जिसमे भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों- गुजरात, राजस्थान, नयी दिल्ली एवं मुंबई महाराष्ट्र आदि से आये हुए शिक्षको एवं शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किये; कॉलेज के अध्यापक डॉ. मनुभाई पटेल, प्रो. आशा बेन आर चौधरी, प्रो सुनीता बेन ठक्कर, प्रो संकेत भाई पारेख, प्रो भरत भाई पटेल, प्रो. कमलेश भाई पटेल, प्रो के एन पटेल, प्रो कृष्णा बेन सिन्धीया, प्रो मयूर भाई कोटक, प्रो राजेश भाई गणावा तथा संस्कृत भारती बनासकांठा के कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा; मंच का सञ्चालन प्रो. तृप्ति बेन पटेल, प्रो सुनीता बेन ठक्कर, प्रो आशा बेन चौधरी एवं डॉ. रमेश भाई चौधरी ने संयुक्त रूप से किया।

-0-प्रस्तुति:प्रोसुनीता बेन ठक्कर