हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

सुनो मुझे भी के लिए सम्मान - संयोजक

मुरादाबाद – साहित्यिक संस्था ‘अक्षरा’ के तत्वावधान में स्टेशन रोड, मुरादाबाद स्थित आर्य समाज के सभागार में कीर्तिशेष श्री 10-utsava-अक्षरादेवराज वर्मा की 10वीं पुण्यतिथि पर दिनांकः 06 दिसम्बर, 2015 को सम्मान-समारोह का आयोजन किया गया जिसमें ग़ाज़ियाबाद के नवगीतकार श्री जगदीश ‘पंकज’ को उनकी सद्यः प्रकाशित नवगीत-कृति ‘सुनो मुझे भी’ के लिए अंगवस्त्र, मानपत्र, प्रतीक चिह्न, श्रीफल नारियल सहित सम्मान राशि रु0 1100 /= भेंटकर ‘देवराज वर्मा उत्कृष्ट साहित्य सृजन सम्मान-2015’ से सम्मानित किया गया। संस्था के संयोजक योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’ ने बताया कि-‘‘साहित्यिक चेतना के धनी स्व. श्री देवराज वर्मा की पुण्यस्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला यह आयोजन देश भर के साहित्य-सृजकों की साहित्य-साधना को समर्पित है, संस्था अब तक प्रख्यात शायरा डा. मीना नक़वी (मुरादाबाद), गीतकार श्री राम अधीर (भोपाल), डा. ओमप्रकाश सिंह (रायबरेली), डा. बुद्धिनाथ मिश्र (देहरादून), श्री श्यामनारायण श्रीवास्तव ‘श्याम’ (लखनऊ), श्री देवेन्द्र ‘सफ़ल’ (कानपुर), युवाकवि श्री राकेश ‘मधुर’ (झज्जर-हरियाणा), शायर श्री ज़मीर ‘दरवेश’ (मुरादाबाद), श्री जयकृष्ण राय ‘तुषार’ (इलाहाबाद) को सम्मानित कर गौरवान्वित है। इस वर्ष नवगीत-कृति ‘सुनो मुझे भी’ के कवि श्री जगदीश ‘पंकज’ (ग़ाज़ियाबाद) को उनकी उत्कृष्ट रचनाधर्मिता को सम्मानित करते हुए संस्था गर्व की अनुभूति कर रही है।’’
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुविख्यात नवगीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी ने कहा कि ‘‘जगदीश ‘पंकज’ के नवगीतों में जन-जन की पीड़ा और अवसाद का बाहुल्य दिखाई देता है, उनकी रचनाओं में कथ्य का नयापन और प्रयोगवादी बिम्ब जब आपस में जुगलबंदी करते हैं तो पाठक और श्रोता प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते।’’ मुख्य अतिथि गीतकार श्री ब्रजभूषण सिंह गौतम ‘अनुराग’ ने ‘पंकज’जी की रचनाधर्मिता पर केन्द्रित चर्चा करते हुए कहा कि ‘‘जगदीश ‘पंकज’ की पुस्तक ‘सुनो मुझे भी’ के गीत आज की अव्यवस्थाओं के संदर्भ में खुलकर बात करते हैं और एक प्रतिरोध का स्वर जगाते हैं’’ विशिष्ट अतिथि डा. अजय ‘अनुपम’ ने कहा कि ‘‘पंकजजी एक समर्थ गीतकवि हैं, उनके गीत अपनी मिट्टी से तो जुड़कर बतियाते ही हैं आपसी रिश्तों में बढ़ती छीजन और आम आदमी की पीड़ा पर सम्यक विमर्श भी करते हैं’’ गीतकार श्री आनंद कुमार ‘गौरव’ के आलेख का वाचन करते हुए कवि श्री विवेक कुमार ‘निर्मल’ ने कहा कि ‘‘पंकजजी की रचनाधर्मिता निष्पक्ष है, निःस्वार्थ है एवं निर्विवाद है, उनके गीतों में अपने समय का युगबोध प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त होता है’’
-योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’