हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

हम सब गुनगुनाएँ - डा.नीलम भटनागर

आएँ आज / अभी

हम सब गुनगुनाएँ /मुस्कराएँ/ खिलखिलाएँ

अकारण नहीं सकारण

क्योंकि ज़िन्दगी एक गीत है ,

नवरंगों का संगीत है ।

भोर से साँझ तक

जागरण से स सुषुप्ति तक

कर्म से विश्राम तक

गुनगुनाएँ , मुस्कराएँ

सुरीली अनुराग बाँसुरी की तान में खो जाएँ ;

क्योंकि ज़िन्दगी एक गीत है

नवरसों का संगीत है |

सुख -दुःख के आसव में

रूप-रस गंध में

धरा से अम्बर तक के विस्तार में

गूँजता यह स्वर है

ज़िन्दगी एक गीत है

नवरसों का संगीत है

इसमें फागुनी ठिठोली है

मरुस्थली वीरानी है

सावनी फुहार है

अवसाद की ठिठुरन है

फिर भी यह गीत है | नवरसों का संगीत है |

इंद्र धनुषी रंग लिये

विद्युत की कौंध लिये

कामदी से त्रासदी की बोधमयी यात्रा है

पल-पल के उत्सव विषाद की रागिनी है

ज़िन्दगी एक गीत है

नवरसों का संगीत है |

आएँ आज/अभी /हम सब

गुनगुनाएँ / मुस्कराते हुए गायें

ज़िन्दगी का गीत है

साँसों का संगीत है

जो हमारा है / हमसे है/ हमारे लिए है

हर पल का साथी है / हम सबका साथी है

फिर क्यों न

जीवन का गीत गुनगुनाएँ

हर पल को जीएँ

मिलजुलकर मुस्कराएँ

क्योंकि ज़िन्दगी एक गीत है

नव रसों का संगीत है |

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सम्पर्क :डा.नीलम भटनागर एम्.ए.(हिन्दी) , पी-एच डी, डी.लिट्,अध्यक्ष हिन्दी विभाग,बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय, आगरा;निवास-4/431बालूगंज आगरा -282001